दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 2329›
शेर 1
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هر موی من از عشقت بیت و غزلی گشته
هر عضو من از ذوقت خم عسلی گشته
G2329:1
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इस शेर की व्याख्या
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