दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 3100›
शेर 4
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اگر چه کوه بود عقل همچو که بپرد
ببین چه صرصر باهیبتست این باری
G3100:4
आपकी भाषा
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इस शेर की व्याख्या
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