दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 346›
शेर 3
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ولیکن جان این کمتر دعاگو
همه شب روی ماهت را دعا گفت
G346:3
आपकी भाषा
आपकी भाषा में अभी तक कोई अर्थ नहीं — यह पूरी ग़ज़ल के लिए एक साथ बनता है:
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इस शेर की व्याख्या
अभी तक नहीं लिखी गई — इस ग़ज़ल के भीतर इस शेर का गहरा पाठ:
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