दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 363›
शेर 1
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چنان کاین دل از آن دلدار مستست
ز خوف صاف ما آن یار مستست
G363:1
आपकी भाषा
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इस शेर की व्याख्या
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