पढ़िए› दफ़्तर 1› यह कभी-कभार ही होता है कि कोई मुरीद किसी धोखेबाज़ ढोंगी में सच्ची आस्था रखता है कि वह कोई खास व्यक्ति है और इस आस्था के कारण वह ऐसी जगह पहुँच जाता है जहाँ उसके शेख ने सपने में भी नहीं देखा होगा और आग और पानी उसे नुकसान नहीं पहुँचा सकते जबकि उसके शेख को नुकसान पहुँचा सकते हैं, लेकिन यह कभी-कभार ही होता है› शेर 2293
M1:2293 — مدعی را قحط جان اندر سرست / لیک ما را قحط نان بر ظاهرست
مدعی را قحط جان اندر سرستلیک ما را قحط نان بر ظاهرست
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M1:2293
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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
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