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بخش ۱۱۳ - در بیان آنک نادر افتد کی مریدی در مدعی مزور اعتقاد بصدق ببندد کی او کسی است و بدین اعتقاد به مقامی برسد کی شیخش در خواب ندیده باشد و آب و آتش او را گزند نکند و شیخش را گزند کند ولیکن بنادر نادر
यह कभी-कभार ही होता है कि कोई मुरीद किसी धोखेबाज़ ढोंगी में सच्ची आस्था रखता है कि वह कोई खास व्यक्ति है और इस आस्था के कारण वह ऐसी जगह पहुँच जाता है जहाँ उसके शेख ने सपने में भी नहीं देखा होगा और आग और पानी उसे नुकसान नहीं पहुँचा सकते जबकि उसके शेख को नुकसान पहुँचा सकते हैं, लेकिन यह कभी-कभार ही होता है