पढ़िए› दफ़्तर 6› उस बादशाह का ज़िक्र जिसने उस विद्वान को जबरदस्ती मजलिस में बुलाया और बैठाया, साकी ने विद्वान को शराब पेश की, उसके सामने प्याला रखा तो उसने मुँह मोड़ लिया और खट्टापन और सख्ती शुरू कर दी, शाह ने साकी से कहा कि “अरे! उसे उसके स्वभाव में ले आओ।” साकी ने कई बार उसके सिर पर मारा और उसे शराब पिलाई, आदि› शेर 3959
M6:3959 — چشمشان افتاده اندر عین و غین / نه حسن پیداست اینجا نه حسین
چشمشان افتاده اندر عین و غیننه حسن پیداست اینجا نه حسین
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M6:3959
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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
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