पढ़िए› दफ़्तर 6› मुजाहिद का बयान कि वह मुजाहिदत से हाथ नहीं खींचता, भले ही वह अल्लाह की अता की व्यापकता जानता हो, कि वह मक़सूद दूसरी तरफ़ से और किसी और तरह के काम के कारण उसे मिलेगा जो उसकी कल्पना में नहीं था। वह सारी कल्पना और उम्मीद इसी खास तरीके पर रखता है, इसी दरवाज़े की कुंडी खटखटाता है, शायद अल्लाह उसे उस दिन वो रोज़ी दे जो उसने सोची भी न हो, "और उसे ऐसी जगह से रोज़ी देता है जहाँ से वह उम्मीद भी नहीं करता। बंदा तदबीर करता है और अल्लाह तक़दीर करता है। और ऐसा भी हो सकता है कि बंदे को बंदगी का वहम हो कि मुझे इस दरवाज़े के अलावा से देगा, हालाँकि मैं इसी दरवाज़े की कुंडी खटखटा रहा हूँ, अल्लाह उसे इसी दरवाज़े से रोज़ी देता है। संक्षेप में, ये सब एक ही घर के दरवाज़े हैं," उसके बयान के साथ› शेर 4195
M6:4195 — رزق تو در زرگری آرد پدید / که ز وهمت بود آن مکسب بعید
M6:4195
अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited
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