पढ़िए› दफ़्तर 6› विलाल का हिजाज़ की धूप में 'अहद अहद' कहना रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मोहब्बत में, उन सुबहों में जब उसका यहूदी आका बुतपरस्ती के कारण उसे हिजाज़ की धूप में कंटीली टहनी से मारता था, और विलाल के बदन से खून उबलता था, और उससे बेइरादा 'अहद अहद' निकलता था, जैसे दूसरे दर्दनाक लोगों से बेइरादा आहें निकलती हैं, क्योंकि वह इश्क़ के दर्द से भरा हुआ था, उसे कांटे के दर्द को दूर करने का कोई ध्यान नहीं था, जैसे फ़िरौन के जादूगर और ज़रजिस और अन्य, जिनकी गिनती नहीं की जा सकती।› शेर 932
M6:932 — ابر را هم تازیانهٔ آتشین / میزنندش کانچنان رو نه چنین
ابر را هم تازیانهٔ آتشینمیزنندش کانچنان رو نه چنین
✦ इस बैत को हिन्दी में प्रस्तुत करें
M6:932
❋ ❋ ❋
अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI
❋
Discussion — Ask about this beyt — answered from the Masnavi, every verse cited
Your conversation stays on this device unless you share it.
What readers asked0
No questions shared yet — yours could be the first.