दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 2017›
शेर 2
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داد شمشیری به دست عشق و گفت
هرچ بینی غیر من گردن بزن
G2017:2
आपकी भाषा
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इस शेर की व्याख्या
अभी तक नहीं लिखी गई — इस ग़ज़ल के भीतर इस शेर का गहरा पाठ:
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