दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 2423›
शेर 3
-
آه الیس ناظری مختلف لطیفه
آه الیس مهجتی مسکنه و بیته
G2423:3
आपकी भाषा
आपकी भाषा में अभी तक कोई अर्थ नहीं — यह पूरी ग़ज़ल के लिए एक साथ बनता है:
ai-draft · gemini-2.5-pro
इस शेर की व्याख्या
अभी तक नहीं लिखी गई — इस ग़ज़ल के भीतर इस शेर का गहरा पाठ:
ganjoor: sh2423 · public domain