दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 2423›
शेर 5
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قوسک حیث ما رمی السهم اصاب مقلتی
سهمک ظل من دمی یکتب قد کفیته
G2423:5
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इस शेर की व्याख्या
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