दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 289›
शेर 1
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یا مخجل البدر اشرقنا بلالا
یا ساقی الروح اسکرنا بصهبا
G289:1
आपकी भाषा
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इस शेर की व्याख्या
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