दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 289›
शेर 2
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لا تبخلن و اوفر راحنا مددا
حتی تنادم فی اخذ و اعطا
G289:2
आपकी भाषा
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इस शेर की व्याख्या
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