दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 3226›
शेर 4
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صرت انا لا انا غیرک عندی فنا
ضدک یا ذاالغنا مختدع احمق
G3226:4
आपकी भाषा
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इस शेर की व्याख्या
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