दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 3226›
शेर 5
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هیچ کس ای جان من، جان سخندان من
نور رخ شد ندید، تا نکند بیدقی
G3226:5
आपकी भाषा
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इस शेर की व्याख्या
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