दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 657›
शेर 1
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گر یک سر موی از رخ تو روی نماید
بر روی زمین خرقه و زنار نماند
G657:1
आपकी भाषा
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इस शेर की व्याख्या
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