दीवान-ए-शम्स›
ग़ज़ल 657›
शेर 4
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در خواب کنی سوختگان را ز می عشق
تا جز تو کسی محرم اسرار نماند
G657:4
आपकी भाषा
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इस शेर की व्याख्या
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