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بخش ۳ - ظاهر شدن عجز حکیمان از معالجهٔ کنیزک و روی آوردن پادشاه به درگاه اله و در خواب دیدن او ولیی را
दासी के इलाज में वैद्यों की असफलता और राजा का ईश्वर के दरबार में विनती करना, और स्वप्न में एक संत को देखना
- M1:55 شه چو عجز آن حکیمان را بدیدپابرهنه جانب مسجد دوید शाह ने जब देखी हकीमों की लाचारी,नंगे पाँव मस्जिद की जानिब भागा वो बेचारी।यह शेर दिखाता है कि जब इंसान के सारे उपाय और ज्ञान विफल हो गए, तो बादशाह ने पूरी विनम्रता और बेताबी के साथ ईश्वर की शरण ली। ❋
- M1:56 رفت در مسجد سوی محراب شدسجدهگاه از اشکِ شه پُر آب شد मस्जिद में जा के वो मेहराब की जानिब बढ़ा,शाह के अश्कों से सज्दागाह पानी से भर गया।यह शेर बादशाह के ख़ुदा की बारगाह में पनाह लेने और मस्जिद की मेहराब में उसकी शिद्दत से गिड़गिड़ाने और रोने को दिखाता है, जब वह अपनी कनीज़ के इलाज से नाउम्मीद हो गया था। ❋
- M1:57 چون به خویش آمد ز غَرقاب فناخوش زبان بگشاد در مدح و دعا जब फ़ना के भंवर से होश में आया,तो तारीफ़ और दुआ में मीठी ज़बान खोली।स्वयं को ईश्वर में विलीन कर देने (फ़ना) के गहरे अनुभव के बाद, जब बादशाह वापस अपनी चेतना में लौटा, तो उसने बहुत सुंदर और मधुर शब्दों में ईश्वर की प्रशंसा और प्रार्थना शुरू कर दी। ❋
- M1:58 کای کمینه بخشِشَت مُلک جهانمن چه گویم چون تو میدانی نهان हे कि तेरी सबसे छोटी बख़्शिश है दुनिया की सल्तनत,मैं क्या कहूँ, जबकि तू जानता है हर छुपी हक़ीक़त।हताश बादशाह ईश्वर की ओर मुड़ता है, उसके असीम ज्ञान और उदारता को स्वीकार करता है, और पूछता है कि ऐसी सर्वज्ञ उपस्थिति के सामने अपनी इच्छाओं को व्यक्त करने की क्या आवश्यकता है। ❋
- M1:59 ای همیشه حاجت ما را پناهبار دیگر ما غلط کردیم راه ऐ हमारी हर ज़रूरत में पनाह देने वाले,हम एक बार फिर राह से भटक गए।जब दुनिया के सारे हकीम नाकाम हो गए, तो बादशाह ने ख़ुदा की बारगाह में अपनी ग़लती मानते हुए पनाह और रहनुमाई की दुआ की। ❋
- M1:60 لیک گفتی گرچه میدانم سِرَتزود هم پیدا کُنَش بر ظاهرت लेकिन तूने कहा, ‘गरचे मैं जानता हूँ राज़ तेरा,फिर भी जल्दी ज़ाहिर कर दे उसे ज़ाहिर पर अपने।’अपनी प्रार्थना में, बादशाह ईश्वर से कहता है कि यद्यपि आप हमारे दिलों के राज़ जानते हैं, फिर भी आपने स्वयं हमें उन्हें अपनी ज़बान पर लाने और प्रकट करने का आदेश दिया है। ❋
- M1:61 چون برآورد از میانِ جان خروشاندر آمد بحرِ بخشایش به جوش जब जान की गहराई से उसने एक पुकार उठाई,तब बख़्शिश (कृपा) के समंदर में लहर आई।यह बेत (दोहा) दर्शाता है कि जब कोई सच्चे दिल से, अपनी आत्मा की गहराई से पुकारता है, तो ईश्वर की कृपा और दया का सागर जोश में आ जाता है। ❋
- M1:62 در میان گریه خوابش دَر رُبوددید در خواب او که پیری رو نمود रोते-रोते ही नींद ने उसे आ लिया,ख़्वाब में देखा कि एक पीर ने दर्शन दिया।अपनी महबूबा की बीमारी के ग़म में रोते-बिलखते बादशाह की आँख लग गई और उसने सपने में एक नूरानी बुज़ुर्ग को देखा। ❋
- M1:63 گفت ای شه مژده، حاجاتت رواستگر غریبی آیدت فردا، ز ماست कहा, ऐ शाह ख़ुशख़बरी, तेरी मुरादें हुईं पूरी,कल गर कोई अजनबी आए, तो जानना वो हमारी ओर से है।राजा के सपने में एक बुज़ुर्ग ने उसे ख़ुशख़बरी दी कि उसकी दुआएँ क़ुबूल हो गई हैं और अगले दिन ख़ुदा की तरफ़ से भेजा गया एक अजनबी हकीम उसके दर्द का इलाज करने आएगा। ❋
- M1:64 چونکه آید او حکیمی حاذقستصادقش دان کو امین و صادقست जब वो आएगा, वो एक माहिर हकीम है,उसे सच्चा जानना, क्योंकि वो अमीन और सादिक़ है।यह शेर उस दिव्य चिकित्सक के गुणों का वर्णन करता है, जिसके आने का वादा बादशाह को उसके सपने में किया गया था; उसे एक बुद्धिमान, कुशल, भरोसेमंद और सच्चा मरहम करने वाला बताया गया है। ❋
- M1:65 در علاجَش سِحرِ مطلق را ببیندر مزاجش قدرتِ حق را ببین उसके इलाज में देख तू निरपेक्ष जादू,उसके मिज़ाज में देख तू हक़ की क़ुदरत।यह बैत (शे'र) पाठक को बताता है कि इस दिव्य चिकित्सक की उपचार-विधि साधारण चिकित्सा जैसी नहीं, बल्कि एक अद्वितीय चमत्कार है, और उसका अस्तित्व स्वयं ईश्वर की शक्ति का प्रकटीकरण है। ❋
- M1:66 چون رسید آن وعدهگاه و روز شدآفتاب از شرق اخترسوز شد जब वो वादे का वक़्त आया और दिन निकल आया,पूरब से सूरज निकला और तारों को जला दिया।यह शेर एक अहम पल के आने या एक महान सत्य के प्रकट होने का वर्णन करता है, जो एक ऐसी शक्तिशाली और चकाचौंध करने वाली रोशनी के साथ आता है जो बाकी सभी छोटी रोशनियों को ख़त्म कर देती है। ❋
- M1:67 بود اندر منظره شه مُنتظرتا ببیند آنچه بنمودند سِر ❋
- M1:68 دید شخصی کاملی پُر مایهایآفتابی درمیانِ سایهای ❋
- M1:69 میرسید از دور مانند هلالنیست بود و هست بر شکلِ خیال ❋
- M1:70 نیستوش باشد خیال اندر روانتو جهانی بر خیالی بین روان ❋
- M1:71 بر خیالی صلحشان و جنگشانوز خیالی فخرشان و ننگشان ❋
- M1:72 آن خیالاتی که دام اولیاستعکسِ مهرویانِ بُستانِ خداست ❋
- M1:73 آن خیالی که شه اندر خواب دیددر رخ مهمان همی آمد پدید ❋
- M1:74 شه به جای حاجبان فا پیش رفتپیش آن مهمانِ غیبِ خویش رفت ❋
- M1:75 هر دو بحری آشنا آموختههر دو جان بیدوختن بردوخته ❋
- M1:76 گفت معشوقم تو بودستی نه آنلیک کار از کار خیزد در جهان ❋
- M1:77 ای مرا تو مصطفی من چو عُمَراز برای خدمتت بندم کمر ❋