पढ़िए दफ़्तर 1 यह कभी-कभार ही होता है कि कोई मुरीद किसी धोखेबाज़ ढोंगी में सच्ची आस्था रखता है कि वह कोई खास व्यक्ति है और इस आस्था के कारण वह ऐसी जगह पहुँच जाता है जहाँ उसके शेख ने सपने में भी नहीं देखा होगा और आग और पानी उसे नुकसान नहीं पहुँचा सकते जबकि उसके शेख को नुकसान पहुँचा सकते हैं, लेकिन यह कभी-कभार ही होता है शेर 2290

M1:2290 — لیک نادر طالب آید کز فروغ / در حق او نافع آید آن دروغ

لیک نادر طالب آید کز فروغدر حق او نافع آید آن دروغ
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M1:2290

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अर्थ · به زبانِ تو — आपकी भाषा · AI

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