مثنوی
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Раздел 119
بخش ۱۱۹ - دانستن شیخ ضمیر سایل را بی گفتن و دانستن قدر وام وامداران بی گفتن کی نشان آن باشد کی اخرج به صفاتی الی خلقی
Знание шейхом мыслей спрашивающего без слов и знание им суммы долга должников без слов, что является признаком того, что «Я вывожу Мои качества Моим творениям»
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حاجت خود گر نگفتی آن فقیر او بدادی و بدانستی ضمیر
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آنچ در دل داشتی آن پشتخم قدر آن دادی بدو نه بیش و کم
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پس بگفتندی چه دانستی که او این قدر اندیشه دارد ای عمو
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او بگفتی خانهٔ دل خلوتست خالی از کدیه مثال جنتست
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اندرو جز عشق یزدان کار نیست جز خیال وصل او دیار نیست
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خانه را من روفتم از نیک و بد خانهام پرّست از عشق احد
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هرچه بینم اندرو غیر خدا آن من نبود بود عکس گدا
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گر در آبی نخل یا عرجون نمود جز ز عکس نخلهٔ بیرون نبود
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در تگ آب ار ببینی صورتی عکس بیرون باشد آن نقش ای فتی
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لیک تا آب از قذی خالی شدن تنقیه شرطست در جوی بدن
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تا نماند تیرگی و خس درو تا امین گردد نماید عکس رو
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جز گلابه در تنت کو ای مقل آب صافی کن ز گل ای خصم دل
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تو بر آنی هر دمی کز خواب و خور خاک ریزی اندرین جو بیشتر
назад بخش ۱۱۸ - اشارت آمدن از غیب به شیخ کی این دو سال به فرمان ما بستدی و بدادی بعد ازین بده و مستان دست در زیر حصیر میکن کی آن را چون انبان بوهریره کردیم در حق تو هر چه خواهی بیابی تا یقین شود عالمیان را کی ورای این عالمیست کی خاک به کف گیری زر شود مرده درو آید زنده شود نحس اکبر در وی آید سعد اکبر شود کفر درو آید ایمان گردد زهر درو آید تریاق شود نه داخل این عالمست و نه خارج این عالم نه تحت و نه فوق نه متصل نه منفصل بیچون و بی چگونه هر دم ازو هزاران اثر و نمونه ظاهر میشود چنانک صنعت دست با صورت دست و غمزهٔ چشم با صورت چشم و فصاحت زبان با صورت زبان نه داخلست و نه خارج او نه متصل و نه منفصل والعاقل تکفیه الاشارة Пришло указание от невидимого к шейху: «Эти два года ты брал и отдавал по Нашему велению, после этого отдавай и не бери. Положи руку под циновку, ибо Мы сделали её для тебя подобной мешку Абу Хурайры. Что бы ты ни пожелал, ты найдёшь, чтобы уверовали все миры, что есть мир иной, в котором земля в твоей руке превращается в золото, мёртвый оживает, великое несчастье превращается в великое счастье, неверие превращается в веру, яд превращается в противоядие. Он не находится внутри этого мира и не вне этого мира, не внизу и не вверху, не соединён и не разъединён, без «как» и без «каким образом». В каждый миг от Него проявляются тысячи следов и образцов, подобно тому, как искусство руки связано с образом руки, и взгляд глаза — с образом глаза, и красноречие языка — с образом языка: Он не находится внутри и не вне его, не соединён и не разъединён». И умному достаточно намёка
далее بخش ۱۲۰ - سبب دانستن ضمیرهای خلق Причина познания мыслей творений