पढ़िए›दफ़्तर 2
दफ़्तर 2 · 3819 शेर · 115 खंड
دفتر دوم
Book II
❋ ❋ ❋
- 001 بخش ۱ - سر آغازप्रस्तावना 111 शेर
- 002 بخش ۲ - هلال پنداشتن آن شخص خیال را در عهد عمر رضی الله عنهउमर रज़िअल्लाह अन्हु के ज़माने में उस व्यक्ति का चाँद के बजाय कल्पना को देखना 23 शेर
- 003 بخش ۳ - دزدیدن مارگیر ماری را از مارگیری دیگرएक सँपेरे का दूसरे सँपेरे से साँप चुराना 6 शेर
- 004 بخش ۴ - التماس کردن همراه عیسی علیه السلام زنده کردن استخوانها از عیسی علیه السلامईसा अलैहिस्सलाम के साथी का ईसा अलैहिस्सलाम से हड्डियों को जीवित करने का अनुरोध करना 15 शेर
- 005 بخش ۵ - اندرز کردن صوفی خادم را در تیمار داشت بهیمه و لا حول خادمसूफ़ी का ख़ादिम को जानवर की देखभाल के लिए सलाह देना और ख़ादिम की लापरवाही 15 शेर
- 006 بخش ۶ - حکایت مشورت کردن خدای تعالی در ایجاد خلقअल्लाह तआला का सृष्टि के निर्माण में परामर्श करने की कहानी 22 शेर
- 007 بخش ۷ - بسته شدن تقریر معنی حکایت به سبب میل مستمع به استماع ظاهر صورت حکایتकहानी के अर्थ की व्याख्या का रुक जाना, श्रोता की कहानी के बाहरी रूप को सुनने की इच्छा के कारण 9 शेर
- 008 بخش ۸ - التزام کردن خادم تعهد بهیمه را و تخلف نمودنख़ादिम का जानवर की देखभाल का वचन देना और फिर उसे पूरा न करना 41 शेर
- 009 بخش ۹ - گمان بردن کاروانیان که بهیمهٔ صوفی رنجورستकारवां वालों का यह सोचना कि सूफ़ी का जानवर बीमार है 81 शेर
- 010 بخش ۱۰ - یافتن شاه باز را به خانهٔ کمپیر زنबाज को बूढ़ी औरत के घर में पाना 54 शेर
- 011 بخش ۱۱ - حلوا خریدن شیخ احمد خضرویه جهت غریمان به الهام حق تعالیशेख अहमद ख़ज़रूये का अल्लाह तआला की प्रेरणा से कर्जदारों के लिए हलवा खरीदना 69 शेर
- 012 بخش ۱۲ - ترسانیدن شخصی زاهدی را کی کم گری تا کور نشویएक व्यक्ति का एक ज़ाहिद को डराना कि कम रोओ, वरना अंधे हो जाओगे 12 शेर
- 013 بخش ۱۳ - تمامی قصهٔ زنده شدن استخوانها به دعای عیسی علیه السلامईसा अलैहिस्सलाम की दुआ से हड्डियों के जीवित होने की पूरी कहानी 46 शेर
- 014 بخش ۱۴ - خاریدن روستایی در تاریکی شیر را به ظن آنک گاو اوستग्रामीण का अँधेरे में शेर को अपनी गाय समझकर खुजलाना 11 शेर
- 015 بخش ۱۵ - فروختن صوفیان بهیمهٔ مسافر را جهت سماعसूफ़ियों का मुसाफ़िर के जानवर को समाअ के लिए बेचना 71 शेर
- 016 بخش ۱۶ - تعریف کردن منادیان قاضی مفلس را گرد شهرकाज़ी के मुफ़्लिस की पूरे शहर में मुनादी कराना 29 शेर
- 017 بخش ۱۷ - شکایت کردن اهل زندان پیش وکیل قاضی از دست آن مفلسक़ैदख़ाने वालों का काज़ी के वकील से उस मुफ़्लिस के ख़िलाफ़ शिकायत करना 29 शेर
- 018 بخش ۱۸ - تتمهٔ قصهٔ مفلسमुफ़्लिस की कहानी का शेष 96 शेर
- 019 بخش ۱۹ - مثلउदाहरण 37 शेर
- 020 بخش ۲۰ - ملامتکردن مردم شخصی را کی مادرش را کشت به تهمتलोगों का उस व्यक्ति को धिक्कारना जिसने अपनी माँ को संदेह में मार दिया था 66 शेर
- 021 بخش ۲۱ - امتحان پادشاه به آن دو غلام کی نو خریده بودबादशाह का उन दो नए खरीदे गए गुलामों का इम्तिहान लेना 21 शेर
- 022 بخش ۲۲ - به راه کردن شاه یکی را از آن دو غلام و ازین دیگر پرسیدنबादशाह का उन दो गुलामों में से एक को भेज देना और दूसरे से पूछना 41 शेर
- 023 بخش ۲۳ - قسم غلام در صدق و وفای یار خود از طهارت ظن خودगुलाम की अपने साथी की ईमानदारी और वफ़ादारी में कसम, अपनी अच्छी नीयत से 142 शेर
- 024 بخش ۲۴ - حسد کردن حشم بر غلام خاصशाही दरबारियों का ख़ास गुलाम से ईर्ष्या करना 145 शेर
- 025 بخش ۲۵ - کلوخ انداختن تشنه از سر دیوار در جوی آبप्यासे का दीवार से नाले में ढेला फेंकना 35 शेर
- 026 بخش ۲۶ - فرمودن والی آن مرد را کی این خاربن را کی نشاندهای بر سر راه بر کنशासक का उस व्यक्ति से कहना कि यह झाड़ी जो तुमने रास्ते में लगाई है, उसे उखाड़ दो 159 शेर
- 027 بخش ۲۷ - آمدن دوستان به بیمارستان جهت پرسش ذاالنون مصری رحمة الله علیهमित्रों का बीमारस्तान में ज़ुनन मिस्री रज़िअल्लाह अन्हु की खबर लेने आना 44 शेर
- 028 بخش ۲۸ - فهم کردن مریدان کی ذاالنون دیوانه نشد قاصد کرده استमुरीदों का यह समझना कि ज़ुनन पागल नहीं हुआ है, बल्कि उसने जानबूझकर ऐसा किया है 17 शेर
- 029 بخش ۲۹ - رجوع به حکایت ذاالنون رحمة الله علیهज़ुन्नून (रहमतुल्लाह अलैहि) के वृत्तांत की वापसी 15 शेर
- 030 بخش ۳۰ - امتحان کردن خواجهٔ لقمان زیرکی لقمان راख़्वाजा लुक़मान की बुद्धिमत्ता की परीक्षा 48 शेर
- 031 بخش ۳۱ - ظاهر شدن فضل و زیرکی لقمان پیش امتحان کنندگانपरीक्षकों के सामने लुक़मान की श्रेष्ठता और बुद्धिमत्ता का प्रकटीकरण 51 शेर
- 032 بخش ۳۲ - تتمهٔ حسد آن حشم بر آن غلام خاصउस विशिष्ट दास पर उस दल के ईर्ष्या का समापन 40 शेर
- 033 بخش ۳۳ - عکس تعظیم پیغام سلیمان در دل بلقیس از صورت حقیر هدهدसुलेमान के संदेश के प्रति बिलक़ीस के हृदय में हुदहुद की तुच्छ आकृति से उपजा सम्मान का उलटा प्रभाव 32 शेर
- 034 بخش ۳۴ - انکار فلسفی بر قرائت ان اصبح ماکم غوراदार्शनिक का 'इन अस्बाहा माकुम ग़ौरान' के पाठ पर आपत्ति करना 86 शेर
- 035 بخش ۳۵ - انکار کردن موسی علیه السلام بر مناجات شبانमूसा (अलैहिस्सलाम) का चरवाहे की प्रार्थना पर आपत्ति करना 30 शेर
- 036 بخش ۳۶ - عتاب کردن حق تعالی موسی را علیه السلام از بهر آن شبانअल्लाह त’आला का मूसा (अलैहिस्सलाम) को उस चरवाहे के कारण डाँटना 22 शेर
- 037 بخش ۳۷ - وحی آمدن موسی را علیه السّلام در عذر آن شبانमूसा (अलैहिस्सलाम) के पास उस चरवाहे के लिए क्षमा का ईश्वरीय आदेश आना 44 शेर
- 038 بخش ۳۸ - پرسیدن موسی از حق سر غلبهٔ ظالمان راमूसा का अल्लाह से अत्याचारियों की शक्ति का रहस्य पूछना 62 शेर
- 039 بخش ۳۹ - رنجانیدن امیری خفتهای را کی مار در دهانش رفته بودएक सोए हुए अमीर को कष्ट देना जिसके मुँह में साँप चला गया था 54 शेर
- 040 بخش ۴۰ - اعتماد کردن بر تملق و وفای خرسभालू की चापलूसी और वफ़ादारी पर भरोसा करना 60 शेर
- 041 بخش ۴۱ - گفتن نابینای سایل کی دو کوری دارمएक अंधे भिखारी का कहना कि मुझे दो अंधापन है 17 शेर
- 042 بخش ۴۲ - تتمهٔ حکایت خرس و آن ابله کی بر وفای او اعتماد کرده بودभालू और उस मूर्ख के वृत्तांत का समापन जिसने उसकी वफ़ादारी पर भरोसा किया था 26 शेर
- 043 بخش ۴۳ - گفتن موسی علیه السلام گوسالهپرست را کی «آن خیالاندیشی و حزم تو کجاست؟»मूसा (अलैहिस्सलाम) का बछड़े की पूजा करने वाले से कहना कि 'तुम्हारी वह कल्पना और सावधानी कहाँ है?' 28 शेर
- 044 بخش ۴۴ - ترک کردن آن مرد ناصح بعد از مبالغهٔ پند مغرور خرس راभालू से मुग्ध उस व्यक्ति को बहुत अधिक सलाह देने के बाद उस सलाह देने वाले व्यक्ति का उसे छोड़ देना 31 शेर
- 045 بخش ۴۵ - تملق کردن دیوانه جالینوس را و ترسیدن جالینوسपागल का जालिनूस की चापलूसी करना और जालिनूस का डरना 8 शेर
- 046 بخش ۴۶ - سبب پریدن و چرخیدن مرغی با مرغی کی جنس او نبودएक पक्षी का दूसरे पक्षी के साथ उड़ने और घूमने का कारण जो उसकी जाति का नहीं था 21 शेर
- 047 بخش ۴۷ - تتمهٔ اعتماد آن مغرور بر تملق خرسउस घमंडी का भालू की चापलूसी पर भरोसा करने का समापन 17 शेर
- 048 بخش ۴۸ - رفتن مصطفی علیه السلام به عیادت صحابی و بیان فایدهٔ عیادتमुस्तफ़ा (अलैहिस्सलाम) का एक सहाबी की बीमारी में जाकर उससे मिलने जाना और बीमारी में मिलने के लाभ का वर्णन 15 शेर
- 049 بخش ۴۹ - وحی کردن حق تعالی به موسی علیه السلام کی چرا به عیادت من نیامدیअल्लाह त’आला का मूसा (अलैहिस्सलाम) को यह संदेश देना कि तुम मेरी बीमारी में मिलने क्यों नहीं आए 11 शेर
- 050 بخش ۵۰ - تنها کردن باغبان صوفی و فقیه و علوی را از همدیگرबाग़बान का सूफ़ी, फ़कीह और अलवी को एक-दूसरे से अलग करना 46 शेर
- 051 بخش ۵۱ - رجعت به قصهٔ مریض و عیادت پیغامبر علیه السلامरोगी और पैगंबर (अलैहिस्सलाम) के मिलने के क़िस्से पर वापसी 6 शेर
- 052 بخش ۵۲ - گفتن شیخ ابویزید را کی کعبه منم گرد من طوافی میکنशेख़ अबु यज़ीद से कहना कि काबा मैं हूँ, मेरे चारों ओर तवाफ़ करो 9 शेर
- 053 بخش ۵۳ - حکایتकहानी 25 शेर
- 054 بخش ۵۴ - دانستن پیغامبر علیه السلام کی سبب رنجوری آن شخص گستاخی بوده است در دعاपैगंबर (अलैहिस्सलाम) का जानना कि उस व्यक्ति की बीमारी का कारण दुआ में गुस्ताख़ी थी 83 शेर
- 055 بخش ۵۵ - عذر گفتن دلقک با سید اجل کی چرا فاحشه را نکاح کردमसख़रा का सैयद-ए-अजल से माफ़ी माँगना कि उसने क्यों एक वेश्या से निकाह किया 5 शेर
- 056 بخش ۵۶ - به حیلت در سخن آوردن سایل آن بزرگ را کی خود را دیوانه ساخته بودभिखारी द्वारा छल से उस महान व्यक्ति को बोलने पर मजबूर करना जिसने खुद को पागल बना रखा था 16 शेर
- 057 بخش ۵۷ - حمله بردن سگ بر کور گداकुत्ते का अंधे भिखारी पर हमला करना 33 शेर
- 058 بخش ۵۸ - خواندن محتسب مست خراب افتاده را به زندانमहतसिब का गिरे हुए शराबी को जेल बुलाना 13 शेर
- 059 بخش ۵۹ - دوم بار در سخن کشیدن سایل آن بزرگ را تا حال او معلومتر گرددभिखारी द्वारा दूसरी बार उस महान व्यक्ति को बोलने के लिए प्रेरित करना ताकि उसकी स्थिति अधिक स्पष्ट हो जाए 56 शेर
- 060 بخش ۶۰ - تتمهٔ نصیحت رسول علیه السلام بیمار راरसूल (अलैहिस्सलाम) की बीमार को दी गई सलाह का समापन 96 शेर
- 061 بخش ۶۱ - وصیت کردن پیغامبر علیه السلام مر آن بیمار را و دعا آموزانیدنشपैगंबर (अलैहिस्सलाम) का उस बीमार व्यक्ति को वसीयत करना और उसे दुआ सिखाना 54 शेर
- 062 بخش ۶۲ - بیدار کردن ابلیس معاویه را کی خیز وقت نمازستइब्लीस का मु’आविया को जगाना कि उठो नमाज़ का वक़्त हो गया है 8 शेर
- 063 بخش ۶۳ - از خر افکندن ابلیس معاویه را و روپوش و بهانه کردن و جواب گفتن معاویه او راइब्लीस का मु’आविया को गधे से गिराना, पर्दा और बहाना करना, और मु’आविया का उसे जवाब देना 5 शेर
- 064 بخش ۶۴ - باز جواب گفتن ابلیس معاویه راइब्लीस का मु’आविया को फिर जवाब देना 35 शेर
- 065 بخش ۶۵ - باز تقریر کردن معاویه با ابلیس مکر او راमु’आविया का इब्लीस से फिर उसकी चाल का वर्णन करना 20 शेर
- 066 بخش ۶۶ - باز جواب گفتن ابلیس معاویه راइब्लीस का मु’आविया को फिर जवाब देना 29 शेर
- 067 بخش ۶۷ - عنف کردن معاویه با ابلیسमु’आविया का इब्लीस पर ज़ोर देना 6 शेर
- 068 بخش ۶۸ - نالیدن معاویه به حضرت حق تعالی از ابلیس و نصرت خواستنमु’आविया का अल्लाह त’आला के हुज़ूर इब्लीस से शिकायत करना और मदद माँगना 8 शेर
- 069 بخش ۶۹ - باز تقریر ابلیس تلبیس خود راइब्लीस का फिर अपनी धोखेबाज़ी का वर्णन करना 16 शेर
- 070 بخش ۷۰ - باز الحاح کردن معاویه ابلیس راमु’आविया का इब्लीस पर फिर ज़ोर देना 14 शेर
- 071 بخش ۷۱ - شکایت قاضی از آفت قضا و جواب گفتن نایب او راक़ाज़ी का क़ज़ा की आफ़त से शिकायत करना और उसके नायब का उसे जवाब देना 12 शेर
- 072 بخش ۷۲ - به اقرار آوردن معاویه ابلیس راमु’आविया का इब्लीस को क़बूल करवाना 9 शेर
- 073 بخش ۷۳ - راست گفتن ابلیس ضمیر خود را به معاویهइब्लीस का मु’आविया से अपने दिल की बात सच-सच कहना 6 शेर
- 074 بخش ۷۴ - فضیلت حسرت خوردن آن مخلص بر فوت نماز جماعتउस मुअक़िद का जमाअत की नमाज़ छूट जाने पर अफ़सोस करने की फ़ज़ीलत 9 शेर
- 075 بخش ۷۵ - تتمهٔ اقرار ابلیس به معاویه مکر خود راइब्लीस का मु’आविया से अपनी चालों का इक़रार करने का समापन 13 शेर
- 076 بخش ۷۶ - فوت شدن دزد به آواز دادن آن شخص صاحبخانه را که نزدیک آمده بود که دزد را دریابد و بگیردचोर का उस व्यक्ति के चिल्लाने से भाग जाना जो चोर को पकड़ने के क़रीब था 32 शेर
- 077 بخش ۷۷ - قصهٔ منافقان و مسجد ضرار ساختن ایشانमुनाफ़िक़ों और उनके द्वारा मस्जिद-ए-ज़रार बनाने की कहानी 23 शेर
- 078 بخش ۷۸ - فریفتن منافقان پیغامبر را علیه السلام تا به مسجد ضرارش برندमुनाफ़िक़ों का पैगंबर (अलैहिस्सलाम) को छलना ताकि वे उन्हें मस्जिद-ए-ज़रार ले जाएँ 40 शेर
- 079 بخش ۷۹ - اندیشیدن یکی از صحابه بانکار کی رسول چرا ستاری نمیکندएक सहाबी का इस इन्कार के साथ सोचना कि रसूल क्यों पर्दापोशी नहीं करते 23 शेर
- 080 بخش ۸۰ - قصهٔ آن شخص کی اشتر ضالهٔ خود میجست و میپرسیدउस व्यक्ति की कहानी जो अपनी खोई हुई ऊँटनी ढूँढ़ रहा था और पूछ रहा था 12 शेर
- 081 بخش ۸۱ - متردد شدن در میان مذهبهای مخالف و بیرونشو و مخلص یافتنविरोधी मतों के बीच भटकना और बाहर निकलने का रास्ता ढूँढ़ना 24 शेर
- 082 بخش ۸۲ - امتحان هر چیزی تا ظاهر شود خیر و شری کی در ویستहर चीज़ की परीक्षा ताकि उसमें जो भलाई और बुराई है वह प्रकट हो जाए 26 शेर
- 083 بخش ۸۳ - شرح فایدهٔ حکایت آن شخص شتر جویندهऊँट ढूँढ़ने वाले व्यक्ति की कहानी के लाभ का वर्णन 43 शेर
- 084 بخش ۸۴ - بیان آنک در هر نفسی فتنهٔ مسجد ضرار هستयह वर्णन कि हर साँस में मस्जिद-ए-ज़रार का फ़ितना है 11 शेर
- 085 بخش ۸۵ - حکایت هندو کی با یار خود جنگ میکرد بر کاری و خبر نداشت کی او هم بدان مبتلاستउस हिन्दू की कहानी जो अपने दोस्त से किसी बात पर झगड़ रहा था और नहीं जानता था कि वह खुद भी उसी से ग्रस्त है 19 शेर
- 086 بخش ۸۶ - قصد کردن غزان بکشتن یک مردی تا آن دگر بترسدग़ज़्ज़ियों का एक व्यक्ति को मारने का इरादा करना ताकि दूसरा डर जाए 13 शेर
- 087 بخش ۸۷ - بیان حال خودپرستان و ناشکران در نعمت وجود انبیا و اولیا علیهم السلامअंबिया और औलिया (अलैहिमुस्सलाम) के वजूद की नेमत में ख़ुद-परस्त और नाशुकरों का हाल बयान करना 29 शेर
- 088 بخش ۸۸ - شکایت گفتن پیرمردی به طبیب از رنجوریها و جواب گفتن طبیب او راएक बूढ़े व्यक्ति का चिकित्सक से अपनी बीमारियों की शिकायत करना और चिकित्सक का उसे जवाब देना 28 शेर
- 089 بخش ۸۹ - قصهٔ جوحی و آن کودک کی پیش جنازهٔ پدر خویش نوحه میکردजोही की कहानी और वह बच्चा जो अपने पिता के जनाज़े के आगे रो रहा था 39 शेर
- 090 بخش ۹۰ - ترسیدن کودک از آن شخص صاحب جثه و گفتن آن شخص کی ای کودک مترس کی من نامردمबच्चे का उस बड़े शरीर वाले व्यक्ति से डरना और उस व्यक्ति का कहना कि ऐ बच्चे डरो मत, मैं इंसान नहीं हूँ 8 शेर
- 091 بخش ۹۱ - قصهٔ تیراندازی و ترسیدن او از سواری کی در بیشه میرفتएक तीरंदाज़ की कहानी और जंगल में जा रहे एक सवार से उसका डरना 13 शेर
- 092 بخش ۹۲ - قصهٔ اعرابی و ریگ در جوال کردن و ملامت کردن آن فیلسوف او راएक अ’राबी की कहानी और बोरी में रेत भरना और उस दार्शनिक का उसे मलामत करना 34 शेर
- 093 بخش ۹۳ - کرامات ابراهیم ادهم قدس الله سره بر لب دریاइब्राहीम इब्न अदहम (क़द्दसल्लाहु सिर्राहू) की करामतें समुंदर के किनारे 30 शेर
- 094 بخش ۹۴ - آغاز منور شدن عارف بنور غیببینअ’आरिफ़ का ग़ैब देखने वाले नूर से रौशन होना शुरू होना 63 शेर
- 095 بخش ۹۵ - طعن زدن بیگانه در شیخ و جواب گفتن مرید شیخ او راअजनबी का शैख़ पर ताना मारना और शैख़ के मुरीद का उसे जवाब देना 37 शेर
- 096 بخش ۹۶ - بقیهٔ قصهٔ ابراهیم ادهم بر لب آن دریاउस समुंदर के किनारे इब्राहीम इब्न अदहम की कहानी का शेष भाग 28 शेर
- 097 بخش ۹۷ - دعوی کردن آن شخص کی خدای تعالی مرا نمیگیرد به گناه و جواب گفتن شعیب علیه السلام مروراउस व्यक्ति का दावा करना कि अल्लाह त’आला मुझे गुनाहों के लिए नहीं पकड़ता और शुऐब (अलैहिस्सलाम) का उसे जवाब देना 34 शेर
- 098 بخش ۹۸ - بقیهٔ قصهٔ طعنه زدن آن مرد بیگانه در شیخउस अजनबी व्यक्ति का शैख़ पर ताना मारने की कहानी का शेष भाग 26 शेर
- 099 بخش ۹۹ - گفتن عایشه رضیالله عنها مصطفی را علیهالسلام کی تو بی مصلی به هر جا نماز میکنی، چونست؟आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) का मुस्तफ़ा (अलैहिस्सलाम) से कहना कि आप मुसल्ला के बिना हर जगह नमाज़ पढ़ते हैं, यह कैसे है? 12 शेर
- 100 بخش ۱۰۰ - کشیدن موش مهار شتر را و معجب شدن موش در خودचूहे का ऊँट की लगाम खींचना और चूहे का ख़ुद पर घमंड करना 42 शेर
- 101 بخش ۱۰۱ - کرامات آن درویش کی در کشتی متهمش کردندउस दरवेश की करामतें जिस पर नाव में इल्ज़ाम लगाया गया था 28 शेर
- 102 بخش ۱۰۲ - تشنیع صوفیان بر آن صوفی کی پیش شیخ بسیار میگویدसूफ़ियों का उस सूफ़ी पर ताना मारना जो शैख़ के सामने बहुत बातें करता है 20 शेर
- 103 بخش ۱۰۳ - عذر گفتن فقیر به شیخफ़क़ीर का शैख़ से माफ़ी माँगना 47 शेर
- 104 بخش ۱۰۴ - بیان دعویی که عین آن دعوی گواه صدق خویش استउस दावे का वर्णन जिसका दावा खुद ही अपनी सच्चाई का गवाह है 29 शेर
- 105 بخش ۱۰۵ - سجده کردن یحیی علیه السلام در شکم مادر مسیح را علیه السلامयहीया (अलैहिस्सलाम) का अपनी माँ के पेट में मसीह (अलैहिस्सलाम) को सजदा करना 5 शेर
- 106 بخش ۱۰۶ - اشکال آوردن برین قصهइस कहानी पर आपत्ति करना 5 शेर
- 107 بخش ۱۰۷ - جواب اشکالआपत्ति का जवाब 13 शेर
- 108 بخش ۱۰۸ - سخن گفتن به زبان حال و فهم کردن آنहाल की ज़बान में बात करना और उसे समझना 11 शेर
- 109 بخش ۱۰۹ - پذیرا آمدن سخن باطل در دل باطلانबातिलों के दिल में बातिल बात का क़बूल होना 5 शेर
- 110 بخش ۱۱۰ - جستن آن درخت کی هر که میوهٔ آن درخت خورد نمیردउस पेड़ को ढूँढ़ना जिसका फल खाने वाला नहीं मरता 18 शेर
- 111 بخش ۱۱۱ - شرح کردن شیخ سِرّ آن درخت با آن طالب مقلدशैख़ का उस मुक़ल्लिद तालिब को उस पेड़ का रहस्य बताना 22 शेर
- 112 بخش ۱۱۲ - منازعت چهار کس جهت انگور کی هر یکی به نام دیگر فهم کرده بود آن راचार व्यक्तियों का अंगूर को लेकर झगड़ना क्योंकि हर एक ने उसे दूसरे नाम से समझा था 32 शेर
- 113 بخش ۱۱۳ - برخاستن مخالفت و عداوت از میان انصار به برکات رسول علیه السلامरसूल (अलैहिस्सलाम) की बरकतों से अंसार के बीच से विरोध और दुश्मनी का ख़त्म हो जाना 53 शेर
- 114 بخش ۱۱۴ - قصهٔ بط بچگان کی مرغ خانگی پروردشانबतख़ के बच्चों की कहानी जिन्हें एक घरेलू मुर्गी ने पाला था 22 शेर
- 115 بخش ۱۱۵ - حیران شدن حاجیان در کرامات آن زاهد کی در بادیه تنهاش یافتندहाजियों का उस ज़ाहिद की करामतों पर हैरान होना जिसे उन्होंने रेगिस्तान में अकेला पाया था 23 शेर